Wednesday, September 19, 2012

4th Dimension





सूचना क्रांति, सूचनाओं का विस्फोट, सूचना युग...मौजूदा दौर को इस तरह के तमाम विशेषणों से नवाजा जा रहा है।.   समाचार माध्यमों में समाज, सियासत, संस्कृति, साहित्य, सिनेमा से जुड़ी सूचनाओ की भरमार है। इन समाचारों के सामजिक सरोकार क्या हैं, समाज पर इसका क्या प्रभाव होता है. इन पर खूब बहस होती है।  बावजूद इसके जन सरोकार से जुड़े कई ऐसे मुद्दे और खबरें हैं, जो कैमरे और खबरनवीसों की नजरों से ओझल हो जाते हैं। आमतौर पर टीवी चैनलों पर समाचारों का चयन टीआरपी क मद्देनजर किया जता है।  इसमें प्रोफाइल और विजुअल की खास भूमिका होती है। ऐसे में जनसरोकार से जुड़े बहुत सारे मुद्दे छूट जाते हैं. । हमारी कोशिश उन अनछुए पहलुओं पर फोकस करने की होगी. हमारा मकसद इस बौद्धिक जुगाली में उन्हें भी शामिल करना है जो अब तक वंचित हैं, उपेक्षित हैं। 


  

      मीडिया के संदर्भ में आमतौर पर कहा जाता है कि ये लोकतंत्र का चौथा खंभा है। लोकशाही की इमारत विधायिका, न्याय पालिका, कार्यपालिका और मीडिया पर टिकी हुई है। मतलब मीडिया की भूमिका बाकी तीनों के बराबर है। लेकिन आज मीडिया का रोल इससे आगे भी है. मीडिया जम्हूरियत के इन हिस्सों की ख़बर भी लेता है.. इसीलिए ये है डेमोक्रेसी का  4th Dimension 



4 comments:

  1. pen is alwayz mightier than a sword :)

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  2. indeed a very unique perspective. u are right in your observation sir, that there is always more than meets the eye.. we would enrich and enhance our knowledge through your writings ...!! thank you sir.

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    1. हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया

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