आंदोलन का डेथ सर्टिफिकेट
बहरहाल.. देर से ही सही अन्ना और अरविंद के रिश्तों का सच उजागर हो चुका है। अन्ना ने केजरीवाल को उनकी राजनीतिक पार्टी के गठन के लिए शुभकामनाएं दी है। लेकिन अपना नाम और तस्वीर लगाने से मना कर दिया है। वैसे भी अरविंद के सिपाहिय़ों ने 'मैं भी अन्ना' की जगह मैं भी केजरीवाल की टोपी पहले ही पहन ली थी.. हां वो अब अन्ना को 'टोपी' नहीं पहना सकेंगे।
खास बात ये है कि अब तक जिन आंकड़ों पर अन्ना समेत पूरी टीम इठलाती रही, अन्ना हजारे ने उन्हें ही खारिज कर दिया. उन्होंने इंडिया एगेंस्ट करप्शन की ओर से कराए गए जनमत सर्वेक्षण को भी निरस्त कर दिया और कहा कि मुझे फेसबुक, इंटरनेट के माध्यम से कराए गए सर्वेक्षण पर भरोसा नहीं है।
अन्ना के बयान से सोशल साइट्स के दीवानों को भी ठेस लगी होगी। विघटित टीम के सदस्यों ने भी अब अन्ना को कोसना शुरू कर दिया है। इनका कहना है कि दिल्ली के लोगों ने अन्ना की छवि को उभारा। कुछ लोग तो यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि अन्ना ने नई तकनीकी से लैस इस टीम का इस्तेमाल किया है। ये तो शुरुआत है.. अब रास्ते अलग-अलग हैं तो आरोप-प्रत्यारोप लगेंगे ही. छह महीने बाद ऐसा होगा कि दोनों एक दूसरे का मजाक उड़ाते नजर आएंगे.
एक बात और ध्यान देने योग्य है कि अन्ना ने इस विघटन के तुरंत बाद बाबा रामदेव से मुलाकात की..बाबा रामदेव ऐसे नवधनाढ़यों के प्रतिनिधि हैं,,जो योग की ओर मुखातिब हैं। या तो रोग की वजह से या फिर टशन के लिए। बाबा का संघ प्रेम जगजाहिर है. ऐसे में बाबा रामदेव से अन्ना हजारे की नजदीकियां फिर आशंकाओं को जन्म देती हैं। किरण बेदी भी बाबा रामदेव के पक्ष में दिखाई देती हैं। जो दिल्ली में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहती हैं।. ऐसे में अन्ना हजारे अगर रानजीतिक पार्टी बनाने के आरोप में केजरीवाल से किनारा करते हैं तो उन्हें बाबा के कदमों से भी सावधान रहना चाहिए.
बहरहाल..अन्ना हजारे का ये रूख अरविंद केजरीवाल को चौंकाने वाला लग रहा है. हालांकि वो निराश नहीं हैं. अन्ना के आदर्शों पर पार्टी बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि देश कठिन दौर से गुजर रहा है. देश बिक रहा है, उनसे जो बन पड़ेगा वो करेंगे।


loved the title sir...:) totally justified n beautifully potrayed :)waiting for more such articles
ReplyDeletethanx aashu
ReplyDeleteसुन्दर, तथ्यात्मक, पठनीय।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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