Saturday, October 13, 2012

आम आदमी-जिंदाबाद!


आम आदमी- जिंदाबाद। देश का नेता कैसा हो- आम आदमी जैसा हो। जो ये नारा लगा रहा है-उसकी टोपी पर लिखा हुआ है- मैं हूं आम आदमी। नारे लगाने वाले और उनका साथ देने वाले सभी ये जयकारा लगाते समय मुस्कुरा रहे थे। जाहिर है इस नारे के साथ उनकी गंभीरता साफ झलक रही थी। जिसके खिलाफ ये नारे लगाये जा रहे हैं, नारे में उनका हाथ भी आम आदमी के साथ ही है। मतलब आम आदमी से न इनका सरोकार है ना उनका। एक और बात। ऐसा कम ही होता है कि कोई व्यक्ति अपना जयकारा खुद लगाता हो। मसलन रामअवतार खुद ये नारे नहीं लगाते कि देश का नेता कैसा हो रामअवतार के जैसा हो। रामअवतार- जिंदाबाद। हां, कमेडी सर्कस के स्टेज पर ऐसा देखा जा सकता है। कमेडी सर्कस के सटायर पर भी खूब तालियां बजती हैं. अरविंद केजरीवाल के इस पैंतरे पर भी खूब तालियां बज रही है। मेरा मतलब ये कतई नहीं है कि अरविंद केजरीवाल कमेडी कर रहे हैं। अब नेता बन गये हैं-तो थोड़ा बहुत अभिनय तो चलता ही है। भीड़ जुटाने के लिए नौटंकी तो करनी ही पड़ती है। गोया मजाक-मजाक में ही सही आम आदमी के नारे तो लगे। इसके लिए केजरीवाल को साधुवाद।  

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